छींक आना वैसे तो एक शारीरिक क्रिया है, परंतु इसे प्राचीन समय से ही अनेक अर्थों में लिया जाता रहा है। उदाहरण के लिए, एक छींक आई तो अशुभ है परन्तु दो छींक आई तो शुभ, जाते हुए आई तो अशुभ, आदि। प्राय: नजला-जुकाम होने पर छींक अधिक आती है, एक के बाद एक छींक आती ही रहती है। लेकिन इस प्रकार की छींक को किसी संकेत से नहींं जोड़ा जाता है। जो छींक अचानक आती है, उसी से प्राय: शुभ-अशुभ का अनुमान लगाया जाता है। तो आज हम छींकने के शुभ अशुभ फल के बारे में चर्चा करेंगे।