वैसे तो सूर्य ग्रह धरती का जीवनदाता है लेकिन ज्योतिष में इसे एक क्रूर ग्रह की संज्ञा दी गई है। यह मानव स्वभाव में तेजी लाता है। यह ग्रह कमजोर होने पर सिर में दर्द, आँखों का रोग आदि देता हैं। जब भी किसी जातक के जन्मपत्र में दूसरे व बारहवें भाव में शुक्र का वर्ग हो या स्वयं शुक्र निर्बल बैठा हो अथवा शुक्र सूर्य के साथ किसी भी भाव में बैठा हो तो आँखों से संबंधित रोग होते हैं। इसके साथ ही अगर मंगल-सूर्य की युति अथवा दृष्टि, सूर्य नीचोंन्मुख होकर शनि से युत अथवा चंद्रमा या मंगल से दृष्ट हो तो नेत्र ज्योति क्षीण होती है।